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Ed RAID : ED ने साढ़े 27 करोड़ FD और 52 लाख कैश सीज किया, इधर राययुर में हड़कंप

छत्तीसगढ़ के शहरों में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की कार्रवाई रुकने का नाम नहीं ले रही है। एक के बाद एक छापेमारी चल रही है। अब भिलाई के शराब कारोबारी त्रिलोक सिंह ढिल्लन उर्फ पप्पू ढिल्लन के 27 करोड़ फिक्स डिपॉजिट को ED ने सीज कर दिया है। इसी के साथ ही नगद मिले 52 लाख रुपए को भी सीज कर दिया है। ईडी ने पप्पू ढिल्लन को गुरुवार को उनके  घर से गिरफ्तार कर रायपुर कोर्ट में पेश किया था, जहां से ईडी ने चार दिन के रिमांड पर लिया है। ईडी ने विज्ञप्ति जारी कर बताया कि ढिल्लन ने शराब के अवैध पैसे को कर्ज के रूप में लेकर अपने खाते में फिक्स डिपॉजिट कर लिया।

दूसरी ओर ईडी ने शुक्रवार को रायपुर में होटल कारोबारी गुरुचरण सिंह होरा और शराब कारोबारी मनदीप चावला और बीड़ी कारोबारी दीयालाल मेघजी के ठिकानों पर भी दबिश दी। होटल कारोबारी गुरुचरण सिंह होरा के देवेंद्र नगर स्थित घर में सुबह 5 बजे ईडी दाखिल होकर कागजों की जांच पड़ताल की।
ईडी ने अपने आरोप पत्र में अनवर ढेबर के साथ अवैध धंधे में गुरुचरण होरा की हिस्सेदारी का जिक्र भी किया है। इसी वजह से अब होरा के घर और दफ्तरों की जांच की जा रही है। वहीं मनदीप चावला के पंडरी और दीयालाल मेघजी के बैजनाथपारा में डीएम प्लाजा और डीएम वाटिका स्थित ठिकानों पर छापेमारी की है। इस छापेमारी को भी दो हजार करोड़ के शराब घोटाले से जोड़कर देखा जा रहा है।

दीयालाल मेघजी 7 सगे भाइयों का एक समहू है, जो खम्हारडीह के नमन डीएम वाटिका में निवास करते हैं। चर्चा है कि ये लोग नवा रायपुर में सिंडीकेट बनाकर किसानों की जमीन खरीदे थे। वहीं मनदीप चावला कृषि विभाग में बड़ा सप्लायर है। बता दें कि शराब घोटाला मामले में रायपुर मेयर एजाज ढेबर के बड़े भाई शराब कारोबारी अनवर को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

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शराब घोटाले मामले में आबकारी विभाग का एक अधिकारी गिरफ्तारED ने शराब केस में शुक्रवार को एक और गिरफ्तारी की। आबकारी विभाग के सीनियर ऑफिसर और शराब वितरण कंपनी सीएसएमसीएल के पूर्व एमडी अरुणपति त्रिपाठी को गिरफ्तार किया। खबर है कि इन्हें महाराष्ट्र से गिरफ्तार कर देर शाम रायपुर कोर्ट में पेश किया गया। ईडी ने अरुणपति त्रिपाठी की 10 दिन की रिमांड मांगी थी पर कोर्ट ने 3 दिन की रिमांड दी है। मामले में ईडी के वकील ने कहा कि ये हमारी पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे थे, इसलिए इन्हें गिरफ्तार करके पूछताछ की जा सकती है। इससे पहले भी कोल स्कैम में दो अधिकारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

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