
महाराष्ट्र सरकार की प्रमुख योजना ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन’ के तहत महिलाओं को होने वाले मासिक 1500 रुपये (अर्थात त्रैमासिक 4500 रुपये) के भुगतान को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। यह विवाद इस बात पर केंद्रित है कि आगामी दो माह की कुल 3000 रुपये की किस्त का भुगतान मकर संक्रांति (14 जनवरी) से पहले किया जाए या बाद में।
मुख्य बिंदु एक नजर में
विवाद की पृष्ठभूमि और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
यह विवाद तब गहरा गया जब राज्य में नगर निगम चुनावों की तारीखों की घोषणा हुई। विपक्षी दल कांग्रेस ने चुनाव आयोग को शिकायत भेजकर आरोप लगाया कि सत्ताधारी गठबंधन ‘महायुति’ चुनाव से ठीक पहले लोकलुभावन योजना के भुगतान का उपयोग मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए करना चाहता है।
इस पर उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने सफाई देते हुए कहा कि सरकार का इरादा मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर महिलाओं को एक उपहार देने का था। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि “चुनाव आयोग का फैसला आखिरी होगा” और यदि आयोग निर्देश देता है तो भुगतान की तारीख को टालकर 16 जनवरी भी किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार नियमों का पूरी तरह से पालन करेगी।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा है कि उसका विरोध योजना के विचार से नहीं, बल्कि चुनाव आचार संहिता का पालन सुनिश्चित कराने के लिए है। उनका मानना है कि चुनाव से पहले ऐसा भुगतान मतदाताओं को गलत तरीके से प्रभावित कर सकता है।
योजना का महत्व और भविष्य
इस बीच, सरकार के एक अन्य वरिष्ठ मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नासिक में एक जनसभा में योजना के भविष्य को लेकर आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि “जब तक देवभाऊ (मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे) मुख्यमंत्री हैं, लाडकी बहिन योजना को कोई नहीं रोक पाएगा।” उन्होंने यह भी बताया कि इस योजना से अब तक लगभग 50 लाख महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं और सरकार का लक्ष्य इस संख्या को 1 करोड़ तक पहुँचाना है।
निष्कर्ष:
लाडकी बहिन योजना के भुगतान की तारीख को लेकर छिड़ा यह विवाद चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के बीच के संतुलन पर एक महत्वपूर्ण बहस को दर्शाता है। अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग के संभावित निर्देश पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि 50 लाख से अधिक महिला लाभार्थियों को यह राशि कब प्राप्त होगी।









