
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की युवा और तेजतर्रार विकेटकीपर बल्लेबाज, ऋचा घोष, ने खेल जगत में शानदार उपलब्धियों के बाद एक और बड़ी सफलता हासिल की है। पश्चिम बंगाल सरकार ने उन्हें राज्य पुलिस में डीएसपी (डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस) के पद पर नियुक्त किया है। यह नियुक्ति न सिर्फ उनकी असाधारण प्रतिभा का, बल्कि खेल और समाज सेवा को एक साथ साधने वाली युवा लड़कियों के लिए एक नई मिसाल का प्रतीक है।
प्रारंभिक जीवन और क्रिकेट की शुरुआत
ऋचा घोष का जन्म 28 सितंबर 2003 को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी शहर में हुआ। क्रिकेट का जुनून उन्हें विरासत में मिला, क्योंकि उनके पिता मानब घोष खुद एक क्रिकेट कोच हैं। उन्होंने ही बेटी के मन में इस खेल के प्रति प्यार जगाया। बचपन में ऋचा अक्सर मोहल्ले के मैदान में लड़कों के साथ क्रिकेट खेलती थीं, जहाँ उनकी प्रतिभा ने धीरे-धीरे सबका ध्यान खींचा।
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण
मेहनत और लगन का परिणाम यह निकला कि ऋचा ने महज 16 वर्ष की उम्र में भारतीय महिला राष्ट्रीय क्रिकेट टीम में जगह बना ली। वह टीम की सबसे कम उम्र की विकेटकीपर बल्लेबाजों में से एक बन गईं। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी और चुस्त विकेटकीपिंग ने जल्द ही उन्हें टीम का एक अहम स्तंभ बना दिया।
2025 महिला विश्व कप में अहम भूमिका
ऋचा घोष का नाम वास्तव में तब रोशनियों में आया जब उन्होंने 2025 महिला वनडे विश्व कप में एक निर्णायक भूमिका निभाई। एक महत्वपूर्ण मुकाबले में उन्होंने जो शानदार पारी खेली, उसने मैच का पूरा पासा ही पलट दिया और भारत को जीत दिलाने में मदद की। इस प्रदर्शन के बाद उन्हें भारतीय महिला क्रिकेट का भविष्य माना जाने लगा।
डीएसपी के पद पर नियुक्ति: एक नया अध्याय
खेल के मैदान पर मिली सफलताओं के बाद अब ऋचा घोष ने समाज सेवा के क्षेत्र में कदम रखा है। पश्चिम बंगाल पुलिस में डीएसपी का पद उनके नाम आना न सिर्फ एक व्यक्तिगत सम्मान है, बल्कि यह देश की उन लाखों युवतियों के लिए एक प्रेरणा है जो खेल और सेवा, दोनों क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल करना चाहती हैं। यह पद दर्शाता है कि प्रतिभा और समर्पण का कोई एक रास्ता नहीं होता।
ऋचा घोष की प्रमुख उपलब्धियाँ
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सबसे युवा विकेटकीपर बल्लेबाजों में से एक।
2025 महिला वनडे विश्व कप में भारत की ऐतिहासिक जीत में निर्णायक योगदान।
पश्चिम बंगाल पुलिस में डीएसपी पद पर नियुक्ति।
कई मैचों में ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ और ‘बेस्ट विकेटकीपर’ जैसे पुरस्कार प्राप्त कर चुकी हैं।
सिलीगुड़ी की गलियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के शिखर तक पहुँचने और अब पुलिस सेवा में देश की सेवा करने का ऋचा घोष का सफर वाकई प्रेरणादायक है। उनकी यह कहानी यह सन्देश देती है कि इच्छाशक्ति और लगन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है, चाहे वह खेल का मैदान हो या फिर समाज सेवा का मोर्चा।









