
हिंदी सिनेमा में कई ऐसे कलाकार हुए जिन्होंने अपने दम पर पहचान बनाने की कोशिश की, लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। एक ऐसे ही अभिनेता रहे सलीम खान। उन्होंने फिल्मों में अभिनय से शुरुआत की, पर उन्हें वह सफलता नहीं मिली जिसकी उन्होंने उम्मीद की थी। कई फिल्मों में काम करने के बावजूद वे बड़े सितारों की कतार में शामिल नहीं हो पाए।
अभिनय में नहीं मिली पहचान, लेखन में मिली असली ताकत
जब अभिनय का सफर उम्मीद के मुताबिक आगे नहीं बढ़ा, तब सलीम खान ने खुद को नए रूप में ढाला। उन्होंने कहानी और पटकथा लेखन की ओर कदम बढ़ाया। जावेद अख्तर के साथ उनकी जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को कई यादगार फिल्में दीं। ‘शोले’, ‘दीवार’ और ‘जंजीर’ जैसी फिल्मों ने उन्हें इंडस्ट्री का मजबूत स्तंभ बना दिया। एक असफल अभिनेता से सफल लेखक बनने तक का उनका सफर संघर्ष और आत्मविश्वास की मिसाल है।
बेटे ने बनाया नया मुकाम
सलीम खान के बेटे सलमान खान ने फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री ली तो किसी ने नहीं सोचा था कि वे एक दिन सुपरस्टार बनेंगे। 1989 में ‘मैंने प्यार किया’ से मिली सफलता ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक हिट फिल्में दीं। ‘हम आपके हैं कौन’, ‘करण अर्जुन’, ‘दबंग’ और ‘बजरंगी भाईजान’ जैसी फिल्मों ने उन्हें बॉक्स ऑफिस का बादशाह बना दिया।
आज सलमान खान केवल अभिनेता नहीं, बल्कि एक ब्रांड हैं। उनकी लोकप्रियता देश ही नहीं, विदेशों तक फैली हुई है। उनकी कमाई और संपत्ति की चर्चा अक्सर होती रहती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी संपत्ति कई पुराने फिल्मी घरानों से भी अधिक बताई जाती है।
परिवार से आगे, लेकिन जड़ों से जुड़े
सलमान खान की तुलना अक्सर कपूर और बच्चन परिवार से की जाती है। आर्थिक रूप से वे कई बड़े नामों को टक्कर देते हैं। इसके बावजूद उनका जीवन पारिवारिक मूल्यों से जुड़ा हुआ है। वे अपने माता-पिता के साथ समय बिताते हैं और अपने भाइयों-बहनों के साथ मजबूत रिश्ता निभाते हैं।
संघर्ष से सफलता तक की कहानी
सलीम खान का जीवन इस बात का प्रमाण है कि असफलता अंत नहीं होती। उन्होंने अपने करियर की दिशा बदली और नई पहचान बनाई। वहीं, उनके बेटे सलमान खान ने उस विरासत को और ऊंचाई दी। यह कहानी केवल स्टारडम की नहीं, बल्कि धैर्य, मेहनत और परिवार की ताकत की भी है।









