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कहा-शादीशुदा महिला की सहमति से बनाए संबंध रेप नहीं!

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई वयस्क एवं विवाहित महिला अपनी स्वतंत्र इच्छा से शारीरिक संबंध बनाती है, तो उसे दुष्कर्म की संज्ञा नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें आरोपी को बरी कर दिया गया था। पीड़िता की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए न्यायालय ने यह अहम व्यवस्था दी।

प्रकरण की पृष्ठभूमि

यह पूरा मामला बेमेतरा जिले का है। याचिकाकर्ता ने अपनी शिकायत में बताया था कि वह एक कृषि महाविद्यालय में मजदूरी करती थी। आरोपी भी वहीं काम करता था। 19 जून 2022 को आरोपी ने उससे बातचीत शुरू की और शादी का झांसा देकर संबंध बनाने का प्रस्ताव रखा। 25 जुलाई 2022 की सुबह करीब चार बजे, शौच के लिए निकलने के दौरान आरोपी ने उसे अपने घर ले जाकर शारीरिक संबंध बना लिए। उस समय पीड़िता पहले से ही तीन माह की गर्भवती बताई गई।

पीड़िता के अनुसार, लोकलाज के कारण उसने यह बात किसी को नहीं बताई, लेकिन बाद में पति के पूछने पर पूरी घटना से अवगत कराया। इसके बाद थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। पुलिस ने जांच कर आरोपी के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया।

निचली अदालत का निर्णय और हाईकोर्ट में चुनौती

ट्रायल कोर्ट ने गवाहों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को दोषमुक्त कर दिया। इस फैसले से असंतुष्ट होकर पीड़िता ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उनके अधिवक्ता के माध्यम से दायर याचिका में ट्रायल कोर्ट के फैसले को गलत बताते हुए उसे रद्द करने की मांग की गई।

उच्च न्यायालय ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने याचिका पर विस्तृत सुनवाई के बाद पाया कि इस मामले में यह साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है कि पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से कम थी। साथ ही, याचिकाकर्ता के खुद के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि आरोपी ने उसकी सहमति से ही शारीरिक संबंध बनाए थे।

कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा कि एक वयस्क और विवाहित महिला के साथ उसकी स्वैच्छिक सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध को दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। ऐसी स्थिति में भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत अपराध नहीं बनता है। इसी आधार पर न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए पीड़िता की याचिका को खारिज कर दिया।

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